जयपुर। राजस्थान विधानसभा के माननीय अध्यक्ष डॉ. वासुदेव देवनानी ने देवर्षि नारद जयंती के पावन पर्व पर समस्त प्रदेशवासियों को अपनी हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई प्रेषित की हैं। उन्होंने इस शुभ अवसर पर देवर्षि नारद के जीवन दर्शन और उनके द्वारा स्थापित संचार के उच्च आदर्शों को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में अत्यंत महत्वपूर्ण और अनुकरणीय बताया है।
डॉ. देवनानी ने अपने शुभकामना संदेश में कहा कि देवर्षि नारद केवल एक पौराणिक पात्र नहीं हैं, बल्कि वे भारतीय सनातन संस्कृति में संवाद, असीम ज्ञान और लोकमंगल (जन कल्याण) के सर्वोच्च प्रतीक माने जाते हैं। उन्होंने कहा कि संपूर्ण विश्व देवर्षि नारद को ब्रह्मांड के 'प्रथम पत्रकार' और 'आद्य संचारकर्मी' के रूप में पूजता है। अपनी अद्भुत संचार कला के माध्यम से उन्होंने सदैव सत्य, निष्पक्षता और व्यापक जनहित को ही अपनी प्राथमिकता बनाया। देवर्षि नारद का तीनों लोकों में निर्बाध गमन और बिना किसी राग-द्वेष या पक्षपात के सूचनाओं का आदान-प्रदान करना, आज के आधुनिक मीडिया के लिए एक बहुत बड़ा और मार्गदर्शक उदाहरण है।
विधानसभा अध्यक्ष ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि देवर्षि नारद का सम्पूर्ण जीवन हमें यह पुनीत प्रेरणा देता है कि किसी भी प्रकार के संवाद या संचार का अंतिम उद्देश्य समाज में केवल और केवल सकारात्मक परिवर्तन लाना ही होना चाहिए। आज जब हम एक तेज-तर्रार डिजिटल और सूचना प्रौद्योगिकी के युग में जी रहे हैं, जहां सूचनाओं का अंबार है और भ्रामक खबरों (Fake News) का खतरा लगातार बना रहता है, ऐसे समय में देवर्षि नारद जी के उच्च आदर्श और भी अधिक प्रासंगिक एवं महत्वपूर्ण हो गए हैं।
डॉ. देवनानी ने स्पष्ट किया कि समाज में एक स्वस्थ और सकारात्मक संवाद, कार्यप्रणाली में पूर्ण पारदर्शिता और एक जिम्मेदार तथा मूल्य आधारित पत्रकारिता को बढ़ावा देने के लिए यह नितांत आवश्यक है कि हम देवर्षि नारद जी के बताए हुए सत्य और धर्म के मार्ग का अनुसरण करें। उनकी संचार शैली में लोक-कल्याण की जो भावना समाहित थी, वही आज की पत्रकारिता का मूल मंत्र होनी चाहिए।
अपने संदेश के अंत में, विधानसभा अध्यक्ष ने प्रदेश के सभी नागरिकों, विशेषकर मीडिया और संचार जगत से जुड़े हुए लोगों से यह भावपूर्ण आह्वान किया कि वे सत्य, उच्च नैतिकता, निर्भीकता और लोककल्याण के शाश्वत मूल्यों को अपने व्यक्तिगत तथा व्यावसायिक जीवन में गहराई से अपनाएं। यदि हम सब मिलकर इन आदर्शों पर चलेंगे, तभी हम एक सशक्त, जागरूक और समरस समाज के निर्माण में अपना बहुमूल्य योगदान दे पाने में सफल होंगे।